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मेरे तो गिरधर गोपाल by मीराबाई — Analysis & Translation

Original Poem

मेरे तो गिरधर गोपाल मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई ॥ ता तनु मन धन सब अर्पौं, और न चाहूँ कोई मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई ॥ जाके चरण कमल में प्रीति, और न धरूँ लोई मीरा के प्रभु गिरधर नागर, सहज मिलेंगे सोई ॥

Translation (Hindi)

मेरे तो गिरधर गोपाल मेरे तो गिरधर गोपाल, और कोई नहीं है। जिसके सिर पर मोर पंख का मुकुट है, वही मेरा पति है। मैं अपना शरीर, मन, और धन सब कुछ समर्पित करती हूँ, और किसी की इच्छा नहीं करती। मेरे तो गिरधर गोपाल, और कोई नहीं है। जिसके चरण कमलों में मेरा प्रेम है, और किसी से प्रेम नहीं करती। मीरा के प्रभु गिरधर नागर, आसानी से मिलेंगे वही।

About the Poet

मीराबाई (भक्ति काल)

मीराबाई एक प्रसिद्ध भारतीय संत और कवयित्री थीं, जो भगवान कृष्ण की भक्त थीं। उनका जन्म 1498 में राजस्थान के मेड़ता में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन को कृष्ण भक्ति में समर्पित कर दिया और उनकी रचनाएँ भक्ति साहित्य का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

Historical Context

Literary Form
भजन
When Written
भक्ति काल (15वीं-17वीं शताब्दी)
Background
यह भजन मीराबाई की भगवान कृष्ण के प्रति गहरी भक्ति और प्रेम को दर्शाता है। उन्होंने अपने जीवन को कृष्ण भक्ति में समर्पित कर दिया था और यह भजन उनकी उसी भक्ति का प्रतीक है।

Sources: https://www.bhaktibharat.com/bhajan/mere-to-giridhar-gopal-dusro-na-koi, https://kavitakosh.org/kk/मेरे_तो_गिरधर_गोपाल_दूसरो_न_कोई_/_मीराबाई

Detailed Explanation

यह भजन मीराबाई की भगवान कृष्ण के प्रति असीम भक्ति और प्रेम को दर्शाता है। मीराबाई कहती हैं कि उनके लिए केवल गिरधर गोपाल ही सब कुछ हैं और उनके अलावा कोई और नहीं है। वह अपने तन, मन और धन को गिरधर गोपाल को समर्पित करती हैं और किसी और की चाह नहीं रखतीं। उनके लिए गिरधर गोपाल ही उनके पति हैं और वे उनके चरण कमलों में प्रेम करती हैं। मीराबाई का यह भजन भक्ति के उच्चतम स्तर को दर्शाता है जहाँ भक्त अपने आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पण और प्रेम व्यक्त करता है। यह भजन भक्ति काल की विशेषताओं को दर्शाता है जहाँ भक्त और भगवान के बीच का संबंध अत्यंत व्यक्तिगत और प्रेमपूर्ण होता है।

Themes

  • भक्ति
  • प्रेम
  • समर्पण

Literary Devices

  • अनुप्रास: 'गिरधर गोपाल' में 'ग' ध्वनि की पुनरावृत्ति
  • उपमा: 'मोर मुकुट' का उपयोग भगवान कृष्ण के लिए
  • रूपक: 'चरण कमल' का प्रयोग भगवान के चरणों के लिए

Word Dictionary

Word Meaning Translation Transliteration
गिरधर कृष्ण कृष्ण का नाम giridhar
गोपाल कृष्ण गायों के रक्षक gopaal
मोर मुकुट मोर पंख का मुकुट कृष्ण का मुकुट mor mukut
अर्पौं समर्पित करूँ देना arpau
चरण कमल पवित्र पैर भगवान के पैर charan kamal
प्रभु भगवान ईश्वर prabhu
नागर शहरवासी कृष्ण के लिए naagar
सहज आसानी से आसानी से sahaj

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