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कब चोबदार पर हों सर-अफ़राज़ देखिए by Unknown — Analysis & Translation

Original Poem

कब चोबदार पर हों सर-अफ़राज़ देखिए उस शोख़ की निगाह में आए हुए तो हैं

Translation (Hindi)

देखें कब दरबान पर सिर ऊँचा होगा उस सुंदर की नजर में तो आ ही गए हैं

About the Poet

Unknown (Modern Urdu Poetry)

इस कविता के लेखक की पहचान नहीं हो सकी है। यह कविता आधुनिक उर्दू कविता के युग से संबंधित है। उर्दू कविता भारतीय और पाकिस्तानी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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Historical Context

Literary Form
Ghazal
When Written
Modern Era
Background
यह कविता उर्दू शायरी की समृद्ध परंपरा का हिस्सा है, जो अक्सर प्रेम, सौंदर्य और सामाजिक परिस्थितियों पर केंद्रित होती है।

Sources: https://poetrylearner.com/poets/19/sahir-ludhianvi/poetry?page=3, https://en.wikipedia.org/wiki/Urdu_poetry

Detailed Explanation

यह कविता उर्दू ग़ज़ल का एक हिस्सा है, जिसमें प्रेम और सौंदर्य की भावना को व्यक्त किया गया है। पहले पंक्ति में, कवि यह कहता है कि वह देखना चाहता है कि कब दरबान (चोबदार) पर उसका सिर ऊँचा होगा, जो एक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है। यह दरबान के सामने सम्मान या गर्व की स्थिति को दर्शाता है। दूसरी पंक्ति में, कवि यह कहता है कि वह उस शोख (सुंदर) की नजर में आ चुका है। यहाँ 'शोख' शब्द का उपयोग किसी प्रिय या आकर्षक व्यक्ति के लिए किया गया है। इस प्रकार, यह कविता प्रेम और आकर्षण की भावना को उकेरती है।

Themes

  • प्रेम
  • आकर्षण

Literary Devices

  • प्रतीक: 'चोबदार' और 'सर-अफ़राज़' का उपयोग सम्मान और गर्व के प्रतीक के रूप में किया गया है
  • उपमा: 'शोख़' शब्द का उपयोग सुंदरता के लिए किया गया है

Word Dictionary

Word Meaning Translation Transliteration
चोबदार दरबान वह व्यक्ति जो दरवाजे पर खड़ा होता है और आगंतुकों की देखरेख करता है chobdaar
सर-अफ़राज़ सम्मानित जिसका सिर ऊँचा हो, गर्वित sar-afraaz
शोख़ सुंदर खूबसूरत shokh
निगाह दृष्टि नज़र nigaah

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